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Thursday, October 25, 2012



भाड़ में जाए चाँदी-सोना,
बच्चा चाहे कोई खिलौना.

एक तेरी आँखों के आगे,
पानी भरता जादू-टोना.

इस कारन मुट्ठी ना खोली,
छूटे ना आँचल का कोना.

इश्क के दीवानों की निशानी,
डूब के हँसना, फूट के रोना.

इन भूखे पेटों के सपने,
पत्तल भर चावल, सब्जी भर दोना.

इतनी बड़ी दुनिया के आगे,
क्या मेरा होना ना होना.

रहनुमाओं से सीखा हमने,
फूलों को काँटों में पिरोना.

नींद कहाँ फिर किस्मत में जब,
छूट गया ममता का बिछोना.

मौत का क्या, आनी-जानी है,
तुम अपना दामन ना भिगोना.

इन ग़ज़लों के माने क्या हैं,
गागर में सागर को समोना.

Thursday, September 24, 2009

बेकरारी अब भी




दिल पे जैसे कुछ नशा था, आँखों में खुमारी सी रही;
मिल गए तुम फिर भी हमको, बेकरारी सी रही.


कहना चाहूं तुम से ही बस, राज़-ए-दिल, राज़-ए-वफ़ा;
कह दिया सब, फिर भी जैसे पर्दादारी सी रही.


दिल में उसके प्यार था, पर आँख में दुनिया थी बसी;
अब जाना क्यूँ प्यार में उसके, दुनियादारी सी रही.


तब भी अपनी सी लगी, जब गैर की दुल्हन बनी;
कैसे उसे मानूं परायी, जो कल तक हमारी सी रही.


ए खुदा, मालिक मेरे, कर दे बस इतना करम,
अब उसे ही दवा बना, जो अब तक बीमारी सी रही.


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