Wednesday, September 23, 2009

दीवाने सा हाल

किसी दीवाने सा हाल किये बैठे हैं, 
फिर उनका ख्याल किये बैठे हैं.


दिल अलग मुसीबत किये बैठा है,
वो अलग बवाल किये बैठे हैं.


मालूम था अंज़ाम तो आगाज़ क्यूँ किया,
हम खुद से ये सवाल किये बैठे हैं.

3 comments:

lalit sharma said...

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं, लेखन कार्य के लिए बधाई
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संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर रचना ।
ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY
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shyam1950 said...

waah !! ye to bat hui na !

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कुछ न कहने से भी छिन् जाता है एजाज़-ए-सुख़न,
जुल्म सहने से भी जालिम की मदद होती है.

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